उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने मातृ मृत्यु दर (MMR) और नवजात शिशु मृत्यु दर (IMR) को कम करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। उन्होंने कहा कि रीवा जिले को इस चुनौती को एक अवसर के रूप में लेना चाहिए।

श्री शुक्ल ने जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे लोगों को जागरूक करें और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने यह बात रीवा में ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस पर जिला प्रशासन और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित नवजात शिशुओं की देखभाल और किशोर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों के प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारंभ के दौरान कही।

उप मुख्यमंत्री ने शत-प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कराने और उनकी नियमित जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि स्त्री रोग विशेषज्ञ प्रत्येक माह की 9 और 25 तारीख को स्वास्थ्य केंद्रों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें और महिलाओं की जांच करें। साथ ही, टेलीमेडिसिन सुविधा का लाभ उठाकर वरिष्ठ चिकित्सकों से परामर्श लेने और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने की सलाह दी गई।

श्री शुक्ल ने यूनिसेफ के प्रतिनिधियों से गांवों में शत-प्रतिशत महिलाओं और नवजात शिशुओं के इलाज व जांच में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम के सहयोग और निष्ठापूर्वक किए गए कार्यों से ही रीवा जिले में आगामी 6 महीनों में सार्थक परिणाम प्राप्त होंगे और इस कार्यशाला का उद्देश्य सफल होगा।

 उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने एकीकृत प्रयासों के माध्यम से रीवा जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने की प्रतिबद्धता जताई है और सभी हितधारकों से सक्रिय रूप से योगदान करने का आह्वान किया है। इससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।