राजगढ़। मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में अहम भूमिका निभाने वाले आउटसोर्स कर्मचारी आज खुद आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। राजगढ़ जिले के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में वर्ल्ड क्लास आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से पदस्थ कर्मचारियों को कथित तौर पर पिछले 5 से 7 महीनों से वेतन नहीं मिला है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों के सामने परिवार का भरण-पोषण करना तक मुश्किल हो गया है।

विडंबना देखिए—जो कर्मचारी दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे हैं, वही आज अपनी मेहनत की कमाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वे लगातार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन देने के नाम पर उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं।

खुजनेर से ब्यावरा तक कर्मचारियों की परेशानी, आखिर सुनवाई कब?

खुजनेर, पचोर, जीरापुर, ब्यावरा, नरसिंहगढ़, सारंगपुर और खिलचीपुर सहित जिले के विभिन्न ब्लॉकों में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर, लैब टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड सहित अन्य आउटसोर्स कर्मचारी वेतन संकट का सामना कर रहे हैं।

इन कर्मचारियों की जिम्मेदारियां स्वास्थ्य सेवाओं से सीधे जुड़ी हैं। इसके बावजूद महीनों तक वेतन नहीं मिलने की शिकायतें व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। सवाल यह है कि जब कर्मचारियों से नियमित रूप से काम लिया जा रहा है, तो उनके वेतन का भुगतान समय पर क्यों नहीं हो रहा?

कर्मचारियों का गंभीर आरोप—“मरे हुए के नाम पर पैसे निकल रहे हैं, जिंदा को वेतन नहीं!”

वेतन को लेकर नाराज कर्मचारियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “साहब, मरे हुए के नाम पर पैसे निकल रहे हैं, हम जिंदा हैं और दिन-रात काम कर रहे हैं। हमारी सैलरी तो डालो!”

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विभाग में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी राशि निकाले जाने की स्थिति है, जबकि जीवित कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है।

यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि, मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान किए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है। संबंधित विभाग और कंपनी का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

‘बजट नहीं है’ कहकर टालने का आरोप, वेतन मांगने पर नौकरी जाने का डर!

कर्मचारियों का कहना है कि जब वे वेतन भुगतान के संबंध में कंपनी के मैनेजर से बात करते हैं, तो कथित तौर पर उन्हें जवाब मिलता है कि फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं है।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि वेतन की मांग करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह कर्मचारियों की समस्याओं को और गंभीर बनाता है।

कर्मचारियों का सवाल है कि आखिर वे अपने परिवार का खर्च कैसे चलाएं? अपने ही मेहनत के पैसे मांगना क्या गलत है? यदि कर्मचारी महीनों तक बिना वेतन के काम करते रहें, तो उनकी आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कौन करेगा?

अब बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारियों के लंबित वेतन की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—संबंधित कंपनी की या स्वास्थ्य विभाग की? कर्मचारियों को आश्वासन नहीं, स्पष्ट जवाब और भुगतान की निश्चित समयसीमा चाहिए।

बच्चों की फीस से लेकर राशन तक उधारी पर, त्योहारों की खुशियां भी संकट में!

वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों के परिवारों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। एक कर्मचारी ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि मार्च 2026 से लगातार काम करने के बावजूद उनके खाते में वेतन नहीं आया है।

बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया और घर का राशन जुटाना मुश्किल हो गया है। परिवार चलाने के लिए उधार लेना पड़ रहा है और कई कर्मचारी कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के बीच कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई है। जहां दूसरे परिवार त्योहार की तैयारियों में जुटे हैं, वहीं इन कर्मचारियों को यह चिंता सता रही है कि घर का खर्च कैसे चलेगा और बच्चों की जरूरतें कैसे पूरी होंगी।

जिस कर्मचारी के कंधों पर स्वास्थ्य सेवाओं को संभालने की जिम्मेदारी है, वही आज अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी को दर्शाती है, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही पर भी सवाल उठाती है।

कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगें

आर्थिक संकट से जूझ रहे आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से निम्न मांगें उठाई हैं—

1. लंबित वेतन का तत्काल भुगतान: सभी पात्र कर्मचारियों का 5 से 7 माह का बकाया वेतन जांच कर एकमुश्त जारी किया जाए।
2. हर महीने समय पर सैलरी: वेतन भुगतान की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि कर्मचारियों को हर महीने आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
3. धमकी के आरोपों की जांच: वेतन मांगने पर नौकरी से निकालने की धमकी देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

अब प्रशासन से जवाब की उम्मीद

राजगढ़ जिले में आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन संबंधी शिकायतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रशासनिक प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कर्मचारी लगातार सेवाएं दे रहे हैं, तो उनके भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है? बजट की समस्या है, कंपनी की लापरवाही है या भुगतान प्रक्रिया में कोई अन्य बाधा है?

इन सवालों का जवाब संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों और आउटसोर्स कंपनी को देना चाहिए। साथ ही, मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान किए जाने के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

कर्मचारियों की मांग साफ है—हमें किसी की मेहरबानी नहीं, अपनी मेहनत का वेतन चाहिए।

अब देखना यह है कि प्रशासन इन कर्मचारियों की पीड़ा को कितनी गंभीरता से लेता है और उनके खातों में वेतन पहुंचाने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैं।